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Date : 25 January 2026 |
नेचर साइंस जर्नल में प्रकाशित एक शोधपरक समाचार के अनुसारभारत के बड़े शहरों के गंदे पानी (वेस्टवॉटर) में ऐसे बैक्टीरिया पाए गए हैं जो दवाओं (एंटीबायोटिक) के असर को खत्म कर सकते हैं। यह एक बड़े शोध में सामने आया है।
वैज्ञानिकों ने 2022 से 2024 के बीच चार बड़े शहरों के 19 जगहों से 447 पानी के नमूने लिए और उनका अध्ययन किया। इसमें उन्होंने यह देखा कि पानी में कौन-कौन से सूक्ष्मजीव (माइक्रोब्स) और दवाओं के खिलाफ काम करने वाले जीन मौजूद हैं।शोध में पता चला कि हर शहर में बैक्टीरिया अलग-अलग थे, लेकिन दवाओं के खिलाफ जो जीन थे, वे लगभग हर जगह एक जैसे मिले। इसका मतलब है कि यह समस्या पूरे शहरों में फैल चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लगभग 53–70% बैक्टीरिया ऐसे थे जिनके बारे में पहले जानकारी ही नहीं थी। यानी गंदे पानी में बहुत बड़ी संख्या में नए और अनजाने जीव मौजूद हैं। टेट्रासाइक्लिन और बीटा-लैक्टम जैसी आम दवाओं के खिलाफ मजबूत प्रतिरोध (resistance) पाया गया। ये जीन ऐसे डीएनए के साथ जुड़े थे जो एक बैक्टीरिया से दूसरे में आसानी से जा सकते हैं, जिससे बीमारी और तेजी से फैल सकती है।शोध में यह भी सामने आया कि कुछ खास तरह के बैक्टीरिया इस प्रतिरोध को ज्यादा फैलाते हैं और हर शहर का अपना अलग तरीका होता है जिससे ये जीन फैलते हैं। इस शोध से पता चलता है कि गंदा पानी सिर्फ गंदगी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा स्थान बन गया है जहाँ खतरनाक बैक्टीरिया और दवाओं के खिलाफ प्रतिरोध तेजी से बढ़ रहा है।अगर ऐसे पानी की निगरानी सही तरीके से की जाए, तो समय रहते इस खतरे को पहचाना जा सकता है और इससे निपटने की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
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