चाँद पर मानव भेजने प्रतिस्पर्धा में अमेरिका-चीन और भारत

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The New Space Race to the Moon: Technological Ambitions and India’s Balanced Approach

Date: 3 April 2026 | Category: Space Science / Global Affairs

Summary

The global race for lunar exploration is intensifying, led by the United States and China, both aiming to send humans to the Moon within this decade. NASA plans a return by 2028, while China targets 2030 and may surpass the US due to ongoing delays.

India is emerging as a balanced and significant space power following the success of Chandrayaan-3. Although it has not announced a human Moon mission timeline, its Gaganyaan program reflects growing capabilities.

While the US and China pursue lunar bases and resource exploration, India focuses on self-reliance, cost-effective missions, and global cooperation, positioning itself as a credible and strategic player in the evolving space race.


अंतरिक्ष अन्वेषण की वैश्विक प्रतिस्पर्धा एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में अमेरिका ने अपने आर्टेमिस-II मिशन के अंतर्गत चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की परिक्रमा हेतु भेजा है, जो 2028 तक चंद्रमा की सतह पर मानव वापसी की उसकी योजना का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसी बीच चीन ने 2030 तक चंद्रमा की सतह पर अपने अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने का लक्ष्य निर्धारित कर इस प्रतिस्पर्धा को और तीव्र बना दिया है।

चीन अपने इस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए ‘मेंगझोउ’ (Mengzhou) नामक अंतरिक्ष यान का उपयोग करेगा, जिसका अर्थ ‘स्वप्न पोत’ है। यह यान लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित किया जाएगा। इसके साथ ही एक अन्य रॉकेट द्वारा ‘लान्यूए’ (Lanyue) नामक चंद्र लैंडर को भेजा जाएगा, जो चंद्र कक्षा में मेंगझोउ से जुड़कर अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक ले जाएगा।

फरवरी 2026 में चीन मानव रहित परीक्षण उड़ान के माध्यम से मेंगझोउ की सुरक्षा प्रणाली और रॉकेट से पृथक्करण की क्षमता का सफल परीक्षण कर चुका है। यदि अमेरिका के आर्टेमिस कार्यक्रम में देरी जारी रहती है, तो 1972 के बाद चंद्रमा पर मानव भेजने वाला अगला देश चीन हो सकता है।

इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत एक उभरती हुई और संतुलित शक्ति के रूप में सामने आया है। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को चंद्र अन्वेषण में अग्रणी स्थान दिलाया है। गगनयान मिशन और भविष्य की योजनाएं भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती हैं।

भारत की रणनीति आत्मनिर्भरता, कम लागत वाले मिशनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है। अमेरिका और चीन जहां स्थायी चंद्र आधार की दिशा में बढ़ रहे हैं, वहीं भारत संतुलित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इस दौड़ में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव, जहां जल-बर्फ की संभावना है, तीनों देशों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए ईंधन का स्रोत बन सकता है।

स्पष्ट है कि चंद्रमा अब केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और तकनीकी श्रेष्ठता की प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुका है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत एक विश्वसनीय और उभरता हुआ प्रमुख खिलाड़ी है।

About the Author

Dr. R. Achal Pulastey
Editor-in-Chief, Eastern Scientist
Researcher | Author | Thinker


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