ग्रीष्म ऋतुचर्या: आयुर्वेद के इन 5 तरीकों से बचें लू (Heatstroke) और भीषण गर्मी से

Public Discourse
Published: May 21, 2026 | Author: डॉ.नीतू श्री

Greeshma Ritucharya (Ayurvedic Summer Regimen) and Heatstroke Prevention

In the era of climate change and rising global temperatures, heatwaves and heatstrokes (sunstrokes) have become significant public health challenges. While modern medicine emphasizes external cooling and rapid rehydration, Ayurveda offers a profound, time-tested preventive framework called Greeshma Ritucharya (Summer Regimen). Authored by Sage Vagbhata in the classical text Ashtanga Hridaya (Sutrasthana, Chapter 3), this regimen outlines the bio-physical impact of the summer season on human physiology and provides comprehensive guidelines for diet, lifestyle, and natural cooling.
Greeshma Ritucharya proves that Ayurveda is fundamentally an ecological science designed to harmonize human biological clocks with seasonal transitions. In the modern context of severe climate vulnerabilities, adopting these traditional parameters—such as drinking earthen-pot water, consuming Sattu and Panchanasara, wearing cotton, and practicing natural cooling—offers a highly scientific, non-invasive, and sustainable shield against heatwaves and clinical heatstroke.

"How to prevent heatstroke in Ayurveda"

गर्मियों का मौसम आते ही देश के कई हिस्सों में हीटवेव (Heatwave) और लू का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान जहाँ हीटस्ट्रोक से बचने के लिए हाइड्रेशन और सनस्क्रीन की सलाह देता है, वहीं प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में इसके लिए एक संपूर्ण वैज्ञानिक जीवनशैली का वर्णन मिलता है।

ऋषि वाग्भट द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ 'अष्टाङ्गहृदये' (सूत्रस्थानम्, अध्याय ३) में 'ग्रीष्म ऋतुचर्या' (Summer Regimen) के अंतर्गत कुछ ऐसे अद्भुत नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करके आप इस भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से पूरी तरह सुरक्षित रह सकते हैं। आइए जानते हैं गर्मियों के लिए आयुर्वेद का यह समर डाइट प्लान और लाइफस्टाइल टिप्स। ठीक इसी प्रकार आयुर्वेद में वसन्त ऋतुचर्या का भी विशेष महत्व बताया गया है।


1. ग्रीष्म ऋतु का शरीर विज्ञान: क्यों लगती है लू?

अष्टाङ्गहृदय के अनुसार, गर्मियों में सूर्य की तेज किरणें पृथ्वी और शरीर के जलीय (सौम्य) अंश को सोख लेती हैं। ग्रंथ में कहा गया है:

"प्रत्यहं क्षीयते श्लेष्मा तेन वायुश्च वर्धते।"

इसका सरल अर्थ है: रोज-रोज की अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर के भीतर का कफ (जलीय तत्व) कम होने लगता है और वात दोष (रूखापन) बढ़ने लगता है। इसी असंतुलन के कारण व्यक्ति का शरीर कमजोर होता है और उसे लू (Heatstroke) लगती है।

गर्मियों में क्या न करें (वर्जित आहार-विहार):

  • तीखे, नमकीन और खट्टे पदार्थ: आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में लवण (नमकीन), कटु (तीखा/मसालेदार) और अम्ल (खट्टा) रस प्रधान भोजन का त्याग करना चाहिए। ये शरीर में पित्त और डिहाइड्रेशन को बढ़ाते हैं।
  • अत्यधिक व्यायाम (Heavy Workout): गर्मियों में बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम या जिम में भारी कसरत करने से बचना चाहिए।
  • कड़कती धूप (Sun Exposure): दोपहर के समय सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आने से बचें, जो कि Heatstroke prevention in Ayurveda का मुख्य नियम है।

2. गर्मियों का डाइट चार्ट: क्या खाएं और क्या पीएं?

गर्मियों में हमारी जठराग्नि (पाचन शक्ति) मंद हो जाती है। इसलिए महर्षि वाग्भट ने निर्देश दिया है— "भजेन्मधुरमेवान्नं लघु स्निग्धं हिमं द्रवम्।" अर्थात् इस मौसम में भोजन मधुर (Naturally Sweet), लघु (पचने में हल्का), स्निग्ध (हल्का चिकनाई युक्त) और तरल (Liquid) होना चाहिए।

आयुर्वेदिक समर डाइट सेवन करने की सही विधि और लाभ
मिश्री और सत्तू (Sattu Drink) शीतल जल में चीनी या मिश्री मिलाकर सत्तू को चाटना या पीना पेट को तुरंत ठंडा करता है।
पञ्चसार मन्थ (Ayurvedic Drink) मधु (शहद), खजूर, मुनक्का, फालसा और मिश्री को मिलाकर बनाया गया शरबत। यह शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को रीचार्ज करता है। आप हमारे अन्य आयुर्वेदिक समर ड्रिंक्स की रेसिपी भी देख सकते हैं।
शालि चावल और मांसरस चमेली के समान सफेद हल्के चावल का भात, जाङ्गल जीवों (जैसे तीतर, बटेर) के पतले मांसरस (सूप) के साथ खाना बलवर्धक है।
भैंस का दूध (Buff Milk) रात के समय मिश्री मिलाकर ठंडा किया गया भैंस का दूध पीना पित्त को शांत करता है और गर्मियों की अनिद्रा दूर करता है।

3. मद्यपान (Alcohol) के सेवन पर आयुर्वेद की सख्त चेतावनी

गूगल पर लोग अक्सर सर्च करते हैं कि क्या गर्मियों में बियर या शराब पीने से शरीर ठंडा होता है? आयुर्वेद इसके बिल्कुल विपरीत चेतावनी देता है:

"मद्यं न पेयं, पेयं वा स्वल्पं, सुबहुवारि वा। अन्यथा शोषशैथिल्यदाहमोहान् करोति तत्॥"

वैज्ञानिक कारण: गर्मियों में शराब का सेवन शोष (Severe Dehydration), शैथिल्य (अंगों की कमजोरी), दाह (शरीर में अत्यधिक जलन) और मोह (बेहोशी या हीटस्ट्रोक कोमा) का मुख्य कारण बन सकता है। इसलिए शराब से पूरी तरह दूर रहें, या अत्यंत कम मात्रा में बहुत सारा पानी मिलाकर ही लें।


4. नेचुरल कूलिंग (Natural AC) के पारंपरिक तरीके

आज के समय में हम एसी और कूलर पर निर्भर हैं, लेकिन अष्टाङ्गहृदय में शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने के बेहतरीन उपाय बताए गए हैं, जो लू से बचने के उपाय के रूप में कारगर हैं:

  • मध्याह्न चर्या (Noon Regimen): दोपहर के समय ऊंचे शाल, ताल या तमाल के वृक्षों की घनी छाया में या अंगूर के बागों (उपवनों) में विश्राम करना चाहिए जहाँ धूप न पहुँचती हो।
  • धारागृह और खस के परदे: ऐसे कमरों में रहें जहाँ ठंडे जल की फुहारें (Fountains) हों या खस (उशीर) के परदों को गीला करके हवा आ रही हो।
  • पुष्प शय्या: केले के पत्तों, कमल और नीलकमल के कोमल फूलों से सजी ठंडी शय्या पर लेटना त्वचा के तापमान को नियंत्रित करता है।
  • रात्रिचर्या (Night Regimen): रात के समय चूना पुते हुए साफ महलों या मकानों की खुली छतों (सौधपृष्ठ) पर सोना चाहिए, जहाँ चंद्रमा की ठंडी चाँदनी सीधे शरीर को शीतलता दे सके।

5. लाइफस्टाइल टिप्स: समर सीजन में कूल रहने के अन्य उपाय

  • चन्दन लेप (Sandalwood Paste): गर्मी और घमौरियों से बचने के लिए शरीर पर ठंडे चन्दन का लेप लगाएं।
  • सूती वस्त्र: इस मौसम में अत्यंत पतले, हल्के और ढीले सूती कपड़े ही धारण करें।
  • प्राकृतिक हवा: ताड़ के पत्तों या मोरपंख से बने पंखों की हवा लें, जिन पर ठंडे जल की बूंदें छिड़की गई हों।
  • सकारात्मक माहौल: मन को शांत रखें, बच्चों की तुतली बोली सुनें और घर में तोते-मैना का कलरव होने दें, जिससे मानसिक तनाव (Mental Stress) न बढ़े।

निष्कर्ष (Conclusion)

अष्टाङ्गहृदय की यह ग्रीष्म ऋतुचर्या प्रमाणित करती है कि आयुर्वेद केवल रोगों की दवा नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जीने की कला है। आज के समय में ग्लोबल वार्मिंग और हीटवेव जैसी आपदाओं से निपटने के लिए फ्रिज के कृत्रिम ठंडे पानी के बजाय मिट्टी के पात्र का जल (घड़े का पानी), पञ्चसार मन्थ, सत्तू और सूती वस्त्रों का उपयोग सबसे सुरक्षित और वैज्ञानिक उपाय है।


FAQs: ग्रीष्म ऋतुचर्या और लू से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. आयुर्वेद के अनुसार गर्मियों में कौन सा रस सबसे फायदेमंद है?

Ans: गर्मियों में मधुर (मीठा) रस सबसे फायदेमंद होता है, क्योंकि यह शरीर को ऊर्जा और शीतलता देता है। लवण (नमकीन), कटु (तीखा) और अम्ल (खट्टा) रसों से पूरी तरह बचना चाहिए

Q2. हीटस्ट्रोक या लू से बचने के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक पेय कौन सा है?

Ans: अष्टाङ्गहृदय के अनुसार पञ्चसार मन्थ (खजूर, मुनक्का, फालसा, मिश्री और शहद का मिश्रण) और मिश्री मिला हुआ सत्तू का घोल लू से बचने के सर्वोत्तम पेय हैं।

Q3. क्या गर्मियों में व्यायाम करना चाहिए?

Ans: आयुर्वेद के अनुसार ग्रीष्म ऋतु में भारी व्यायाम (Heavy Exercise) पूरी तरह वर्जित है। इस मौसम में केवल हल्का योग या प्राणायाम ही करना चाहिए।

Dr. Nitu Shri

About the Author

डॉ. नीतू श्री — वर्तमान में मेजर एस.डी.सिंह पीजी आयुर्वेद मेडिकल कालेज, फतेहगढ़, फर्रुखाबाद (उ.प्र.) के द्रव्य गुण विभाग की विभागाध्यक्ष हैं। एक समर्पित चिकित्सक, शिक्षाविद् और शोधकर्ता के रूप में डॉ. नीतू ने अपने विषय से संबंधित स्तरीय पुस्तकों का लेखन किया है। उनके अनेक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके साथ ही, आप सुप्रसिद्ध बहुविषयक शोध-पत्रिका 'ईस्टर्न साइंटिस्ट' (Eastern Scientist) के संपादक मंडल की सम्मानित सदस्य हैं।

  • Journal Home
  • Article Views :

    How to Cite this Article :


    Related Articles

    Post a Comment

    0 Comments