2025- विकास का उत्सव या वैश्विक असमानताओं का विस्तार ?

Eastern Scientist | www.easternscientist.in
Print ISSN: 2581-7884 | Volume III | Issue 33 | October-December 2025 |

Editorial

Date : 03January 2026

Editor-in-Chief :


विज्ञान-वैश्विक राजनीति एवं साहित्य के क्षेत्र में एक वर्षांत समीक्षा

प्रगति का प्रश्न और सत्ता की छाया

वर्ष 2025 को यदि केवल उपलब्धियों और आँकड़ों की सूची के रूप में देखा जाएतो यह विज्ञानप्रौद्योगिकी और रचनात्मकता का एक असाधारण वर्ष प्रतीत होता है। अंतरिक्ष विज्ञान ने ब्रह्मांड की आरंभिक गहराइयों तक झाँकने का साहस कियाजीवन विज्ञान ने जीन-संपादन को प्रयोगशालाओं से बाहर लाकर मानव उपचार तक पहुँचायाकृत्रिम बुद्धिमत्ता ने ज्ञान-उत्पादन की गति और दिशा दोनों को बदल दियाऔर साहित्य ने भाषाई तथा सांस्कृतिक सीमाओं को लांघते हुए वैश्विक मंच पर नए संवाद रचे।

जहाँ वैज्ञानिक उपलब्धियाँ मानव के सुखद भविष्य का दावा करती हैंवहीं सत्तायुद्ध और बाज़ार नई असमानताओं की  संरचना रचते दिखाई देते हैं। 

-अचल पुलस्तेय   

इन सबके बीच “विकास” एक उत्सवधर्मी शब्द के रूप में बार-बार दोहराया गया—सरकारी घोषणाओं मेंकॉरपोरेट रिपोर्टों मेंऔर अंतरराष्ट्रीय मंचों के भाषणों में। परंतु आलोचनात्मक दृष्टि से प्रश्न यह नहीं है कि विकास हुआ या नहींबल्कि यह है कि यह विकास किसके लिए हुआकिसके नियंत्रण में रहाऔर इसके सामाजिक–राजनीतिक परिणाम क्या रहे।

क्या 2025 की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक प्रगति मानवता को अधिक समता मूलकन्यायपूर्ण और संवेदनशील विश्व की ओर ले जाती हैया फिर यह नई प्रकार की वैश्विक असमानताओंतकनीकी वर्चस्वऔर सांस्कृतिक प्रभुत्व को और गहरा करती है?

यह लेख 2025 को केवल उपलब्धियों का वर्ष मानने से इनकार करता है। यह उसे ज्ञानसत्ता और समाज के जटिल अंतर्संबंधों के संदर्भ में परखने का प्रयास है—जहाँ हर प्रगति अपने साथ एक नया प्रश्न भी लेकर आती है।

1. विज्ञान और प्रौद्योगिकी : उपलब्धि बनाम पहुँच

1.1 अंतरिक्ष विज्ञान : ब्रह्मांड की खोजपृथ्वी की अनदेखी?

James Webb Space Telescope द्वारा अत्यंत प्राचीन गैलेक्सी MoM z14 की खोज और Vera C. Rubin Observatory की ‘First Light’ उपलब्धियाँ मानव जिज्ञासा और तकनीकी क्षमता की पराकाष्ठा हैं। ये खोजें न केवल ब्रह्मांड की उत्पत्ति और संरचना को समझने में सहायक हैंबल्कि यह भी दिखाती हैं कि मानव ज्ञान किस स्तर तक विस्तारित हो चुका है।परंतु यहाँ एक बुनियादी विरोधाभास उभरता है। जब अरबों डॉलर अंतरिक्ष अभियानों में निवेश किए जा रहे हैंउसी समय पृथ्वी पर जलवायु संकटखाद्य असुरक्षाजल संकट और स्वास्थ्य असमानताएँ और गहरी होती जा रही हैं। अफ्रीकाएशिया और लैटिन अमेरिका के बड़े हिस्से आज भी बुनियादी वैज्ञानिक सुविधाओं से वंचित हैं।

यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विज्ञान की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर है। क्या विज्ञान केवल जिज्ञासा-प्रेरित अन्वेषण हैया उसे मानवीय संकटों के प्रति उत्तरदायी भी होना चाहिए?

2025 में अंतरिक्ष विज्ञान की उपलब्धियाँ जितनी चमकदार हैंउतनी ही वे इस प्रश्न को भी तीखा बनाती हैं कि पृथ्वी की समस्याएँ अब भी “द्वितीयक” क्यों मानी जा रही हैं।

 1.2 जीवन विज्ञान और चिकित्सा : उपचार की क्रांति या जैव-विशेषाधिकार?

2025 में जीवन विज्ञान ने जिस तेज़ी से प्रगति कीउसने चिकित्सा की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ दिया। CRISPR आधारित व्यक्तिगत जीन थेरेपी द्वारा दुर्लभ आनुवंशिक रोगों के उपचार, HIV के छिपे वायरस को निष्क्रिय करने की नई तकनीकेंऔर नैनो-स्तरीय चिकित्सा उपकरण—ये सभी मानव जीवन को लंबा और बेहतर बनाने का दावा करते हैं। परंतु इस “उपचार की क्रांति” के भीतर एक गहरी असमानता छिपी हुई है। ये उपचार अत्यंत महंगे हैंउच्च तकनीकी अवसंरचना पर निर्भर हैं और कुछ चुनिंदा देशों तथा संस्थानों तक सीमित हैं। विकासशील देशों की विशाल आबादी के लिए ये उपलब्धियाँ अभी भी दूर का सपना हैं।

इससे एक मूलभूत प्रश्न उभरता है—क्या भविष्य की चिकित्सा ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य’ की अवधारणा को मजबूत करेगीया यह ‘जैव-विशेषाधिकार’ का नया रूप बनेगीयहाँ विकास जीवन-रक्षा का साधन तो हैपर सामाजिक समानता का नहीं।

1.3 कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम तकनीक : नवाचार या नया वर्चस्व?

2025 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग ने अनुसंधानसुरक्षावित्त और संचार के क्षेत्र में निर्णायक हस्तक्षेप किया। AI आधारित खगोलिकी ने लाखों छिपे तारों की पहचान कीक्वांटम चिप्स ने डेटा प्रसंस्करण की सीमाएँ बदलींऔर नैनो AI प्रणालियों ने कम ऊर्जा में अधिक कार्यक्षमता का वादा किया। परंतु इन तकनीकों पर नियंत्रण कुछ गिने-चुने वैश्विक कॉरपोरेट समूहों और शक्तिशाली राष्ट्रों के हाथों में सिमटता जा रहा है। डेटाएल्गोरिदम और कंप्यूटिंग शक्ति—तीनों का केंद्रीकरण एक नए प्रकार के वर्चस्व को जन्म देता हैजिसे कई विद्वान डिजिटल उपनिवेशवाद कहते हैं। यहाँ विकास तकनीकी हैपर सत्ता अत्यंत असमान। तकनीक का लाभ वैश्विक हैपर नियंत्रण सीमित हाथों में।

2. वैश्विक राजनीति : शक्ति-संतुलन और असमानताओं का विस्तार

2.1 सत्ता की पुनर्रचना और वैश्विक अस्थिरता

2025 की वैश्विक राजनीति स्थिरता का नहींबल्कि अस्थिरता और पुनर्संरचना का संकेत देती है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को फिर से टकराव की भाषा की ओर मोड़ा। NATO और G20 जैसे मंचों पर वैचारिक विभाजन गहराएऔर बहुपक्षीय सहयोग की जगह राष्ट्रीय हितों की संकीर्ण परिभाषाएँ उभरने लगीं। यूक्रेनगाज़ासूडान और म्यांमार जैसे संघर्ष क्षेत्रों में युद्ध और हिंसा जारी रही। इन संघर्षों में विकास की भाषा लगभग अनुपस्थित रही—वहाँ केवल सुरक्षाहथियार और भू-राजनीतिक हितों की चर्चा थी। मानवीय संकटविस्थापन और नागरिक जीवन की क्षति वैश्विक राजनीति के हाशिए पर चली गई। यह स्थिति बताती है कि विकास की अवधारणा राजनीतिक शक्ति-संतुलन के अधीन हो चुकी है।

2.2 आर्थिक विकास और नई खाइयाँ

भारत का 2025 में विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह आर्थिक वृद्धि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को मजबूत करती है। परंतु इसके समानांतर बेरोज़गारीअसंगठित श्रमग्रामीण संकट और सामाजिक विषमता भी बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर भीचीन–अमेरिका व्यापार तनावआपूर्ति शृंखला संघर्ष और संसाधनों पर प्रतिस्पर्धा यह स्पष्ट करती है कि आर्थिक विकास अब सहयोग की नहींबल्कि प्रतिस्पर्धा और प्रभुत्व की भाषा बोलता है। विकास यहाँ वृद्धि (growth) हैपर न्याय नहीं।

3. समाज और जनआंदोलन : प्रतिरोध की नई चेतना

2025 में दुनिया भर में उभरे Gen Z आधारितनेतृत्वहीन सामाजिक आंदोलनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि युवा पीढ़ी विकास के आधिकारिक आख्यान से संतुष्ट नहीं है। बेरोज़गारीभ्रष्टाचारजलवायु संकट और सामाजिक असमानता के विरुद्ध ये आंदोलन केवल विरोध नहींबल्कि विकास की वैकल्पिक कल्पना प्रस्तुत करते हैं।ये आंदोलन बताते हैं कि विकास का अर्थ केवल GDP या तकनीकी प्रगति नहींबल्कि मानवीय गरिमासहभागिता और न्याय है।

4. साहित्य : विकास के विरुद्ध मानवीय प्रश्न

जहाँ विज्ञान और राजनीति अक्सर शक्ति और नियंत्रण की भाषा बोलते हैंवहीं साहित्य 2025 में संवेदनास्मृति और प्रतिरोध की भाषा बनकर उभरा।नोबेल साहित्य पुरस्कार से लेकर International Booker Prize तकक्षेत्रीय भाषाओं और अनुवाद साहित्य की वैश्विक स्वीकृति यह संकेत देती है कि साहित्य वैश्विक असमानताओं के विरुद्ध एक वैचारिक मंच बन रहा है। साहित्य ने 2025 में बार-बार यह प्रश्न उठाया— क्या विकास मनुष्य को केंद्र में रखता हैया मनुष्य को विकास के लिए बलिदान करता है?

समग्र मूल्यांकन : उत्सव और संकट के बीच 2025

2025 एक साथ दो विरोधी प्रवृत्तियों का वर्ष है—

 एक ओर वैज्ञानिक और रचनात्मक उपलब्धियों का उत्सव,

 दूसरी ओर सत्तातकनीक और पूँजी के माध्यम से गहराती असमानताएँ।

यह वर्ष स्पष्ट करता है कि विकास अब मूल्य-निरपेक्ष नहीं रहा। वह राजनीतिक हैवैचारिक है और सत्ता-संरचनाओं से गहराई से जुड़ा है।

भविष्य की दिशा : विकास की नैतिक पुनर्परिभाषा

2025 हमें यह सोचने के लिए बाध्य करता है कि आने वाला दशक केवल तकनीकी प्रगति का नहींबल्कि विकास की नैतिक पुनर्परिभाषा का दशक होना चाहिए। यदि विज्ञान मानवता से कटता हैराजनीति न्याय से और विकास समानता से—तो यह उत्सव नहींसंकट होगा। इसलिए 2025 को केवल “विकास का वर्ष” नहींबल्कि विकास पर प्रश्न उठाने का वर्ष के रूप में याद किया जाना चाहिए। 

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Dr. R. Achal

Dr. R. Achal Pulastey

Editor-in-Chief, Eastern Scientist

A multidisciplinary scholar. His writings focus on the interrelationships between Ayurveda, culture, folklore, and history, alongside environment, economic shifts, and geopolitical changes.



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