मास हिस्टीरिया (Mass Hysteria)

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Public Discourse   

मास हिस्टीरिया (Mass Hysteria) एक ऐसी स्थिति है जिसमें एक बड़े समूह के लोगों में अचानक और अनियंत्रित उत्साह,भय,चिंता आदि भाव उभर जाते हैं। यह अक्सर किसी विशिष्ट घटना या स्थिति के कारण होता है, जैसे कि  प्राकृतिक आपदा, महामारी,धार्मिक प्रेरणा, भय आदि। इस स्थिति में वह समूह कोई भी कष्ट सहने या खतरा मोल लेने के लिए तैयार होता है।

अचानक और अनियंत्रित उत्साह, भय और चिंता, तनाव और अवसाद,असामान्य व्यवहार, जैसे कि पैनिक अटैक या हिस्टीरिकल रिएक्शन,सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था में व्यवधान इसके लक्षण होते हैं।

मास हिस्टिरिया का कारण गलत सूचनायें अफवाह,धार्मिक प्रेरण,आस्था आदि से प्रेरित होते हैं। सामान्यतः इसके पृष्ठभूमि में सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक,राजनैतिक,आर्थिक, मृत्युभय, लोभ आदि उद्दीपक होते है।  

इसमें बड़ी भूमिका सूचना प्रचार तंत्र की होती है,जो आम आदमी के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालती है।वह सोचने की स्थिति में नहीं रह पाता है। जो सोचने की कोशिश करता है वह समूह भय से असफल हो जाता है। यह जरूरी नहीं है अनपढ़,अशिक्षित या गरीब लोगों में ही हो,इस स्थित में उच्च शिक्षित भी उतना ही प्रभावित होते है जितने अशिक्षित ।

इसे समझने के लिए कोरोना महामारी के समय के स्मरण किया जा सकता है। वर्तमान कुम्भ की भीड़ को भी इस दृष्टि से देखा जा सकता है।

मास हिस्टिरिया की दुर्घटनाओं से बचने के लिए सटीक विश्वसनीय सूचनायें कारगर होती हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों को समझना और उसकी वैज्ञानिक चिंतन परक व्याख्या भी इसमें सहायक होती है।

 

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