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भारत में गरीबी, प्रतिनिधित्व और यूजीसी एक्ट : समानता के अधूरे वादे का संकट
धर्म का राजनीतिकरण: साधना से भक्ति तक की यात्रा
बजट 2026: आम आदमी की वर्तमान और 2047 का भविष्य
 जयंती पर विशेष-क्रांतिधर्मा कवि गुरु रविदास
भोजपुरी गाँव: बदलती अर्थव्यवस्था, जमी हुई जाति
भारत–यूरोपीय संघ एफटीए और भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था
सोने की आसमानी उड़ान में उजड़ी अर्थव्यवस्था, आयुर्वेद और आम आदमी
गणतंत्र दिवस पर विशेेष विमर्श- उत्तर भारतीय राष्ट्रबोध: सांस्कृतिक वर्चस्व, ज्ञान-राजनीति और अधूरा लोकतंत्र
पूँजीवाद के दौर में भारतीय गणतंत्र  के स्वास्थ्य की पैथालाजी -एक विमर्श
यूजीसी एक्ट 2026 : कैंपस की लोकतांत्रिक आत्मा पर नियंत्रण की कोशिश
 कैंपस में विचारों की हत्या : भारतीय विश्वविद्यालय किस ओर जा रहे हैं?
धर्मिक उफान के दौर में लोक-शास्त्र और टूटती सामूहिकता के साथ बसंत पंचमी पर्व
AI, इंसान की सोच का विकल्प नहीं  विस्तार में सहयोगी है ।
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