दुनिया के देशों में गरीबी को मुख्यतः आर्थिक अभाव के रूप में समझा जाता है—आय की कमी , रोज़गार का संकट और बुनियादी सुवि…
Read moreअचल पुलस्तेय (स्वतंत्र विचारक,लेखक,कवि,कथाकार) यह लेख धर्म के उस समकालीन स्वरूप का आलोचनात्मक विश्लेषण करता है , जिस…
Read moreसंपादकीय | ईस्टर्न साइंटिस्ट-डॉ.आर.अचल बजट 2026 ऐसे समय प्रस्तुत हुआ है, जब सत्ता का विमर्श ‘विकसित भारत @2047’ के दी…
Read moreसरोज कुमार पाण्डेय वरिष्ठ कवि संस्थापक अध्यक्ष देवार संस्कृति न्यास, देवरिया उप्र गुरु रविदास को केवल भक्ति-कवि कहना उ…
Read moreआज यूजीसी एक्ट-2026 को लेकर बहस का बाजार गर्म है। कथित उच्च जातियाँ विरोध में हैं तो पिछड़ी,दलित आदिम जातियाँ समर्थन म…
Read moreदेश हित का महत्वपूर्ण फैसला-यूजीसी, शंकराचार्य जैसे गैर जरूरी शोर में दब गया। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्ता…
Read moreभारत में सोने की कीमतों की तेज़ बढ़ोतरी को अक्सर वैश्विक बाज़ार की मजबूरी कहा जाता है , लेकिन यह भारतीय अर्थव्यवस्था मे…
Read more-अचल पुलस्तेय 1 भारतीय राष्ट्रबोध का निर्माण केवल ऐतिहासिक घटनाओं से नहीं हुआ है , बल्कि यह एक विशिष्ट ज्ञान-राजनीत…
Read moreआज जब हम अपने देश का 77वाँ गणतंत्र दिवस मना रहे हैं तब दुनिया में लोकतंत्र के स्वास्थ्य को लेकर चिंतायें भी जाहिर की जा…
Read more-डॉ.चतुरानन ओझा* सोशल मीडिया पर इन दिनों प्रस्तावित यूजीसी एक्ट 2026 को लेकर तीखी बहस चल रही है। लेकिन विडंबना यह है क…
Read moreभारतीय विश्वविद्यालय अब ज्ञान -विमर्श, विस्तार, विकास के केन्द्र नहीं, बल्कि वैचारिक गुंडागर्दी के अखाड़े बनते जा रहे ह…
Read moreशास्त्रीय परम्परा में बसंत पंचमी केवल एक तिथि नहीं , बल्कि एक ऋतु-चक्र का उत्सव है। पौराणिक परम्परा के अनुसार यह प…
Read moreAI और क्रिएटिविटी: जब सवाल ‘क्या सोचना है’ नहीं , ‘ कैसे सोचना है’ बन जाए आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( AI) को लेकर सबस…
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